गुरुवार, 1 अक्टूबर 2009

माँ तेरी याद बहुत आती है





माँ तेरी याद बहुत आती है
जब सुबह जागता हूँ मैं,तू याद आती है
कितने प्यार से जगती थी तुम, लेकिन यहाँ कोई नहीं है
जब मै कॉलेज जाता हुँ मुझे लगता है पीछे तुम खड़ी होगी
लेकिन तुम नहीं होती
माँ तेरी याद बहुत आती है


लंच के समय जब कैंटीन में जाता हूँ
स्कूल के दिनों का टिफिन याद आता है
कितने प्यार से देती थी तुम
और मै कितने नखरे करता था
लेकिन यहाँ कोई टिफिन नहीं देता है
जो मिलता है वही खा लेता हूँ
माँ तेरी याद बहुत आती है।

जब शाम को थक कर आता हूँ
कमरे में खुद को अकेला पाता हूँ
कभी रात में खाना खाता हूँ
कभी बिन खाए सो जाता हूँ
माँ जब मैं अकेला होता हूँ
मुझे रोना आ जाता ह
कभी रहा नहीं मैं तेरे बिन
अब हर पल रहता हूँ तेरे बिन
माँ तेरी याद बहुत आती है।

जब मैं बीमार होता हूँ
कोई देखने वाला नहीं होता
रोता हूँ,तड़पता हूँ
खुद से दवा खाता हूं
माँ तेरी याद बहुत आती है।

जब बात करता हूं,फोन पर तुमसे
उसके घंटों बाद तक रोता हूं
माँ क्यों भेजी तुम इतना दूर
मुझसे रहा नहीं जाता है
माँ तेरी याद बहुत आती है।


माँ तुमने जो दी है शिक्षा
वो हर पल आते है काम
गलत आदतों से मुझे बचाता
सही रास्ते की प्रेरणा देता
माँ मुझसे दूर हो तुम
पर दिल के सबसे करीब हो तुम
माँ तेरी याद बहुत आती है।

1 टिप्पणी:

  1. मां के प्रति अपने मन में उमडते विचारों को सुन्दर शब्दों में पेश किया है,
    बधाई स्वीकार करें....
    शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

    जवाब देंहटाएं