
12 april2010 ko nai dunia newspaper me chhapi huyi meri story


अजीब दास्ता है यहां। जिन्दगी बहुत कुछ सिखाती है और बहुत कुछ बताती है। हमें पत्रकारिता में ईथिक्स- ईथिक्स रटाया जाता है, लेकिन मार्केट में ऐसे लोग होते है जो सिर्फ अपने फायदे देखते है और उसके लिए कुछ भी कर सकते है। आज कुछ ऐसा ही हुआ आईआईएमसी में बिग एफ वाले टेस्ट लेने के लिए आए, लगभग 100 कैंडि़डेट हो गए टेस्ट देने वाले। हिन्दी के सबसे ज्यादा थे, इससे शायद आऱटीवी के निदेशक डर गए और उन्होने स्क्रिप्ट टेस्ट को इंटरव्यू में बदल दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि स्क्रिप्ट लेखन में हिन्दी वाले ज्यादा अच्छे है . ऐसा ही हुआ । हिन्दी वालो से इंटरव्यू में उन्होंने किसी से कुछ भी नहीं पुछा बस नाम- पता तक ही सीमित रहा,ऐसा लग रहा था मानो रस्म अदायगी का काम कर रहे है। यह साफ नजर आ रहा थि कि वो हिन्दी वाले किसी को लेने ही नहीं आएं है। पता लगा जिन्दगी बहुत कुछ सिखाती है... 