
आज आईआईएमसी में हमारा अंतिम क्लास थी। आज इक्जाम खत्म हो गए और इसी के साथ हमारा क्लास भी खत्म हो गया। 8 महीने पहले 27 जुलाई को यहां आया था । समय कब बीत गया पता ही नहीं चला । यहां पर कुछ पाया है मैंने, लेकिन बहुत कुछ नहीं पाया। खैर सफर ठीक ठाक ही रहा। अब आगे क्या होगा पता नहीं।
यह बड़ा भावुक दिन होता है। करियर की चिंता तो होती ही है,संस्थान में बिताए पल भी लंबे समय तक कचोटते हैं। मगर यही नियति है। आगे की सुधि लीजिए। भावुकता कई बार आगे बढने में बाधा बनती है। मगर जिनकी यादों में हम खोए रहते हैं,उन्हें भी सफल व्यक्ति की ही तलाश होती है। शुभकामनाएं ।
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