
12 साल बाद सिनेमा हॉल गया वाकई में अलग ही दुनिया है सिनेमा हॉल का । जब सेवेंथ में पढता था तब लास्ट टाइम सिनेमा हॉल गया था उसके बाद इसलिए नहीं गया क्युकी मुझे लगता था हॉल जाना अच्छी बात नहीं है और इससे पढई पर एफ्फेक्ट पड़ेगा । खैर पढाई को पुरे मन से किया और पोस्ट ग्रेजुएसन भी हो गया । छोटे से गाँव से दिल्ली आ गया लेकिन कभी भी नहीं गया । कई बार ऑफर मिला कभी भैया ने ऑफर दिया कभी दोस्तों ने लेकिन कभी भी नहीं गया । कभी जाने का मन भी नहीं हुआ और जरुरत भी महसूस नहीं हुयी लेकिन अब जब जॉब ज्वाइन कर लिया तब तनाव कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है फिर भी कभी नहीं सोचा की सिनेमा हॉल जाना चाहिए । पिछले हफ्ते दिल्ली गया तो ऑफर मिला पि वी आर चलने का जाने का मन भी हो गया लेकिन नहीं जा सका । दोस्त हमेशा गली देते थे क्युकी मै उनके साथ नहीं जाता था । जयपुर आये ४ महिना हो गए तब से मेरे सरे दोस्त और भैया बोलते थे जाओ राज मंदिर जा के देखो लेकिन कभी नहीं गया सोचता था अकेले क्यों जाऊ । कल अचानक से भैया के एक दोस्त आये और बोले चलोगे राज मंदिर मेरा भी ऑफ था और रूम पे खली बैठा था हां बोल दिया कल ये नहीं सोचा की जाना चाहिए या नहीं एकदम से बोल दिया हा चलिए । शो का टाइम घर पे हो गया था फिर भी निकल गया ये सोचकर की देर से भी पहुचुन्गा तो कोई बात नहीं है मुझे तो राज मंदिर देखना है। १५मिनट लेट पंहुचा बुत वाकई में बहुत मज़ा आया
राज मंदिर की जितनी तारीफ़ सुना था सब छोटा साबित हुआ
दूसरी बात पहली बार इतने बड़े परदे पे फिल्म देखने में भी मज़ा आया । सोचता हु तो लगता है एक छोटे से गाँव के सिनेमा हॉल से सीधे राज मंदिर का सफ़र वाकई में बड़ा मज़ेदार रहा....
अब तो सोचता हु वीकेंड और ऑफिस के तनाव को निकलने हर हफ्ते चला जाऊ
खैर देखा जायेगा ............................






