
आजकल दिल उदास है,
अपनी काबिलियत पर भी संदेह होने लगा है
फिर मन में यही खयाल आता है मैं सबकुछ कर सकता हू
फिर दिल को तसल्ली देने के लिए सोचता हू कि जरुर कुछ अच्छा होने वाला है इसलिए समय लग रहा है.
बचपन से अभी तक कभी किसी चीज के लिए सब्र नहीं करना पड़ा है, इसलिए तनाव हो रहा है , लेकिन मैं इसे अपने उपर हावी नहीं होने दूंगा।
कहा भी गया है सब्र का फल मीठा होता है,
लेकिन पता नहीं मेरे सब्र करने का फल कितना मीठा होगा
फिर यही सोचता हू कि अगर आईआईएमसी में नहीं होता तो कहां होता
खैर मेरा अभी क्या होगा पता नहीं, लेकिन मुझे पता है कि मेरा भविष्य बहुत अच्छा होगा
जिन्दगी के कई रंग है, उन्हीं का सामना कर रहा हू, उतार चढ़ाव की शुरुआत हो चुकी है
नदी की धारा की तरह हो गई है जिन्दगी कहीं सीधा तो कहीं टेढ़ा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें